अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सी.एन.जी (CNG) संपीडित प्राकृतिक गैस (Compressed Natural Gas) का संक्षिप्त रूप है। यह पेट्रोल का एक सह्ज और किफ़ायती विकल्प है। यह प्राकृतिक गैस का ही संपीडित रूप है। पर्यावरण के हिसाब से सी.एन.जी, पेट्रोल और डीजल से बेह्तर मानी जाती है और इसका खर्च भी बहुत कम है।
1. आर्थिक लाभ: अगर ह्म प्रति किलोमीटर के हिसाब से देखें तो सी.एन.जी की कीमत, पेट्रोल की कीमत से लगभग एक तिहाई पड़ती है। इससे पैसे की काफ़ी बचत होती है और सी.एन.जी किट लगवाने का खर्चा भी बहुत जल्दी कवर हो जाता है।
2. पर्यावरण लाभ: सी.एन.जी, पेट्रोल की तुलना में बहुत कम प्रदूषण फ़ैलाता है। सी.एन.जी के इस्तेमाल से वाहन से निकलने वाली हानिकारक गैसो का उत्सर्जन काफ़ी कम हो जाता है। अगर हम परंपरागत ईंधन – पेट्रोल से अगर तुलना करें तो कार्बन मोनोआक्साइड गैस (carbon monoxide) का उत्सर्जन 70% से 90% तक और हाइड्रोकार्बंस (hydrocarbons) का उत्सर्जन 40% से 60% कम हो जाता है। कार्बन डाइऑक्साइड (carbon dioxide), जो कि भूमण्डलीय ऊष्मीकरण (global warming) का एक बडा कारण है, का उत्सर्जन भी 10% कम हो जाता है।
3. टैक्स में बचत: कॉर्पोरेट संगठन, कंपनियां, आदि एक सी.एन.जी किट लगवाने पर 100% मूल्यह्रास (depreciation) का फ़ायदा उठा सकते हैं क्योंकि सी.एन.जी किट प्रदूषण नियंत्रित करने का उपकरण है.
4. उपयोग में आसानी: सी.एन.जी किट लगवाने पर इंजन में कोई बदलाव नही करना पडता। आप वाहन को पेट्रोल या सी.एन.जी, दोनो पर चला सकते हैं।
सी.एन.जी का भन्डारण (storage) वाहन में एक सिलेंडर में होता है, जिसका निर्माण कडे मापदंडो के अन्तर्गत किया जाता है और पूरी तरह सुरक्षित होता है। सी.एन.जी किट अत्यधिक सुरक्षित होती है और पूर्ण रूप से सीलबंद होती है, जिससे सी.एन.जी के रिसाव का कोई खतरा नहीं होता। और अगर किसी कारण रिसाव होता भी है तो सी.एन.जी हल्की होने की वजह से हवा में विलीन हो जाती है और आग का खतरा पैदा नही होता। इसके विपरीत अगर पेट्रोल का रिसाव हो जाता है तो वह एक जगह इकट्ठा हो जाता है और आग लगने का खतरा हो सकता है। सी.एन.जी 1200°F पर आग पकडती है और पेट्रोल 600°F पर आग पकडता है। इस हिसाब से सी.एन.जी पेट्रोल से कहीं ज्यादा सुरक्षित है।
सी.एन.जी विषैली नहीं होती और न ही किसी प्रकार की हानि पहुँचाती है।
सबसे पह्ले यह सुनिश्चित कर लें कि जिस वर्कशाप (workshop) से आप किट लगवा रहें हैं, वह सरकार से मान्यता प्राप्त है और वर्कशाप किट लगाने में सारे सुरक्षा मापदंडो का पालन कर रही है। सी.एन.जी किट और सिलेंडर आपकी कार मॉडल के लिये अधिकृत होने चाहिये। अलग-अलग जगहो से किट के हिस्से बिल्कुल नहीं खरींदे। कभी भी अपने-आंप कार में किट फ़िट ना करें। किट लगवाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि किट निर्माता द्वारा बताई गई सारी एहतियात बरत ली गयी है। किट लगवाने के बाद जांच ले कि किसी जगह से गैस का रिसाव तो नहीं हो रहा। वर्कशाप से किट लगवाने का प्रमाणपत्र लेना न भूलें। किट में कोई भी परिवर्तन या संशोधन सिर्फ़ अधिकृत वर्कशॉप में ही किया जाना चाहिये। सी.एन.जी वाहन में बरतने वाली सारी सावधानियो से अपने आप को अवगत कर लें और उनका कडाई से पालन करें। अगर आपका वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है तो उसे एक अधिकृत वर्कशॉप में ले जाएं और उसकी पूर्ण रूप से जांच करवाएं। वर्कशॉप से दोबारा प्रमाणपत्र जरूर लें। कार में सी.एन.जी सिलेंडर की जगह कोई और सिलेंडर (जैसे कि रसोई गैस सिलेंडर) न लगवायें। यह असुरक्षित और गैर कानूनी है।
सी.एन.जी का सिर्फ़ एक नुकसान है- सी.एन.जी सिलेंडर कार की डिक्की (Boot) में फ़िट किया जाता है। इससे डिक्की में सामान रखने की जगह कम हो जाती है। किट लगवाने की लागत भी थोडी ज्यादा है लेकिन विशेषज्ञों का दावा है कि इस लागत को ईंधन बचत बहुत जल्दी पूरी कर देता है।
नहीं।
अगर हम पेट्रोल से तुलना करे तो सी.एन.जी पर चलाने से आप 60% तक बचत कर सकते हैं।
सी.एन.जी रेटरोफ़िट्मंट (retrofitment) आपको विकल्प देता है कि आप गाडी सी.एन.जी अथवा पेट्रोल पर चला सकते हैं। डैशबोर्ड (dashboard) पर स्थित स्विच (switch) दबाने पर, आप गाडी सी.एन.जी अथवा पेट्रोल पर चला सकते हैं।
हाँ, निश्चित रूप से। आपकी कार मूल रूप से पेट्रोल पर चलने के लिये बनाई गई है, इसलिये हम आपको सलाह देते हैं कि दिन में कम से कम दस प्रतिशत आप अपनी कार पेट्रोल पर चलायें। इससे आपकी कार का पर्फॉर्मन्स (performance) बेहतर होगा।
सी.एन.जी सिलेंडर अत्यधिक सुरक्षित है। सी.एन.जी सिलेंडर का निर्माण मुख्य विस्फ़ोटक नियंत्रक, भारत सरकार द्वारा अनुमोदित कडे मापदंडो के अन्तर्गत किया जाता है। इसे सुरक्षित बनाने के लिये, इसमें एक सुरक्षा वाल्व (valve) लगा होता है जिसे आपात स्थिति में बन्द किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त एक सुरक्षा डिस्क (safety burst disc) भी लगी होती है, जो सिलेंडर में ज्यादा दबाव होने पर फ़ट जाती है और सी.एन.जी गैस वातावरण में घुल जाती है।
यह अभी एक विवादास्पद विषय है, लेकिन सभी कार निर्माता सी.एन.जी किट लगी कारे बाजार में उतार रहें हैं। अभी तक किये गये अनुसंधान (research) से सी.एन.जी से ईंजन को कोई हानि नहीं देखी गयी है। मारुती सुजुकी अल्टो, वैगन-आर और एस-एक्स 4 (SX4) के सी.एन.जी मॉडल बाजार में उतार चुकी है और आगे भी पर्यावरण अनुकूल कारें बाजार में लाने के लिये समर्पित है। मारुती के सी.एन.जी माडल, कंप्यूटर नियन्त्रित गैस वितरण प्रणाली से सज्जित है। इन माडलो में आई-जीपीआई (i-GPI) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो मारुती सुजुकी ने खुद ही विकसित किया है।
दोनो के प्रदर्शन ज्यादा अंतर नहीं है। सी.एन.जी के उपयोग से कार चलाने की लागत में 60% तक की बचत हो जाती है।
नहीं। निर्माता द्वारा निर्धारित सर्विस करने के बाद इंजन की सिर्फ़ सी.एन.जी ट्यूनिंग की जाती है।
*अपरा से सी.एन.जी किट लगवाने पर एक साल तक ट्यूनिंग मुफ़्त की जाती है।
आप अपरा से 300/- की नाममात्र कीमत पर ट्यूनिंग करवा सकते हैं।
लगभग 6 साल।
हां, हम डीजल कारों को सी.एन.जी में परिवर्तित कर सकते हैं लेकिन इसमें इंजन में बहुत ज्यादा बदलाव करना पडेगा और खर्चा बहुत ज्यादा आएगा।वैकल्पिक इंधन इस्तेमाल करने का मकसद मूल रूप से पैसा बचाना है, इसलिये हम सलाह देतें हैं कि आप डीजल कार को सी.एन.जी में परिवर्तित न ही कराएं।
हवा को छानने वाला फिल्टर (air filter) ईंधन क्षमता में एक मह्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। धूल भरी परिस्थितियों में वाहन चलाने से एयर फ़िल्टर का जीवन कम हो जाता है। फ़िल्टर की नियमित सफ़ाई होनी चाहिऎं और हर 1000 किलोमीटर पर फ़िल्टर बदल देना चाहिऎ।
सी.एन.जी दोहरी ईंधन प्रणाली में, कार सी.एन.जी अथवा पेट्रोल पर चला सकते हैं। इंजन को पेट्रोल से सी.एन.जी पर लाने के लिये अथवा सी.एन.जी से पेट्रोल पर बदलने के लिये सिर्फ़ डैश बोर्ड पर स्थित एक बटन दबाने की जरूरत है।
हां।